कान्हा की हरियाली में सफ़ेद रहस्य

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बैम्बू पोस्ट 16 जनवरी 2026 मुक्की जोन कान्हा
से विशेष रिपोर्।
कान्हा राष्ट्रीय उद्यान का मुक्की जोन—जहाँ आमतौर पर सन्नाटा पत्तों की सरसराहट में घुला रहता है—आज अचानक एक अनदेखे दृश्य का गवाह बन गया। सुबह की धूप जब साल और सागौन के तनों से छनकर ज़मीन पर उतर रही थी, तभी झाड़ियों के बीच एक विशाल सफ़ेद गुब्बारा-सा आकार पर्यटकों की नज़र में आया।
पहली नज़र में यह वस्तु न तो किसी जानवर की आकृति थी, न ही जंगल में सामान्यतः दिखने वाली कोई संरचना। पत्तियों के बीच आधा छिपा, स्थिर और अस्वाभाविक रूप से चमकता हुआ—मानो जंगल के भीतर कोई खामोश संदेश रखा गया हो।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह वस्तु हवा में हिलती नहीं दिखी, न ही उससे किसी तरह की आवाज़ आई। कुछ पर्यटकों ने इसे मौसम संबंधी उपकरण बताया, तो कुछ ने इसे किसी शोध दल का छोड़ा हुआ गुब्बारा माना। लेकिन सवाल यह है कि—बिना किसी सूचना के, संरक्षित क्षेत्र के भीतर यह पहुँचा कैसे?
वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह मानव-निर्मित सफ़ेद गुब्बारा प्रतीत होता है, संभवतः हवा के साथ भटककर यहाँ तक पहुँचा। फिर भी, इसकी स्थिति और समय ने कई शंकाओं को जन्म दिया है। सुरक्षा के लिहाज़ से क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है और वस्तु को सावधानीपूर्वक हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

जंगल अपनी भाषा में रहस्य कहता है—और मुक्की जोन में मिला यह सफ़ेद संकेत उसी भाषा का एक अनुवाद बन गया है। क्या यह महज़ संयोग है, या किसी लापरवाही का नतीजा?
फ़िलहाल, कान्हा की हरियाली ने अपने भीतर इस सफ़ेद रहस्य को समेट रखा है—और जवाब हवा में तैर रहे ।

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