जंगल में “नोटभक्षी” हाथियों की दस्तक

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बैम्बू पोस्ट 4 दिसम्बर 2025 बिलासपुर।

बम्हनी गांव में धान–कंबल के साथ “नकद भक्षण” का अनोखा मामला

विशेष संवाददाता का रिपोर्टिंग।

हाथियों की गतिविधियों पर नज़र रखने वाले एक व्हाट्सएप समूह से सामने आई जानकारी ने वन विभाग से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है। चैटिंग के अनुसार, 3 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 3 से 5 बजे के बीच बम्हनी गांव में चार जंगली हाथियों का दल अचानक घुस आया और बैठा जनजाति परिवारों के घरों को नुकसान पहुँचाया।

सूत्रों का कहना है कि हाथियों ने घरों में रखा धान और कंबल “भोज्य सामग्री” समझकर उदरस्थ कर लिया, साथ ही केले के पौधों को उखाड़ फेंका। परंतु मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब एक ताज़ा चैट में यह “विस्फोटक खुलासा” हुआ कि हाथी घर में रखे नोट भी खा गए।

ग्रामीणों में चर्चा है कि इस बार हाथियों का पारंपरिक भोजन पर्याप्त न रहा और शायद महंगाई के दौर में हाथियों ने भी “नकद आहार योजना” अपना ली।

इसी बीच ज्ञात हुआ कि कुछ दिन पहले अचानकमार अभ्यारण्य में छत्तीसगढ़ के वन मंत्री महोदय रात्रिकालीन प्रवास पर आए थे — रात्रिभोज किया, विश्राम लिया और थकान उतारी। पर हाथियों के इस “आर्थिक साहसिक अभियान” से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं, यह अभी शोध का विषय बना हुआ है।

उधर, पूरा मामला सामने आते ही व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन ‘मिस्टर एम’ ने अचानक पूरी चैट डिलीट कर दी, ताकि “जंगल में ज्यादा हलचल न हो।” हालांकि, तब तक कई सदस्य स्क्रीनशॉट लेकर वायरल कर चुके थे, जिससे हाथी-नोट कांड जंगल से निकलकर जनता तक पहुँच गया।

वन विभाग की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि नोट सच में खाए गए या केवल “डिजिटल चर्चा” का शिकार बने। हालांकि हाथियों के खाते में अब “धान+केला+कंबल+नकद” जैसी नई डाइट जुड़ चुकी है।

फिलहाल बम्हनी गांव में डर और हास्य दोनों का अनोखा माहौल है। ग्रामीण पूछ रहे हैं —
“जब इंसान पैसों के पीछे भागता है, तो हाथी उन्हें सीधे खा जाए तो उसे क्या कहा जाए?”

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