ग्रंथालय प्रकाशन की ऐतिहासिक उपलब्धि: ‘शोधकोष’ जर्नल स्कोपस में इंडेक्स

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Editor-in-Chief डॉ. कुमकुम भारद्वाज—महारानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, इंदौर के फाइन आर्ट्स विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्षं

Managing Editor डॉ. टीना पोरवाल

बैम्बू पोस्ट 19 जनवरी 2026 बिलासपुर।
इंदौर स्थित प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था ग्रंथालय प्रकाशन एवं प्रिंटर्स (Granthaalayah Publications and Printers) ने अकादमिक जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। संस्था द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका “शोधकोष: जर्नल ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (Shodhkosh: Journal of Visual and Performing Arts)” को विश्व-प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस Scopus में आधिकारिक रूप से इंडेक्स किया गया है।
यह उपलब्धि ग्रंथालय प्रकाशन की Editor-in-Chief डॉ. कुमकुम भारद्वाज—महारानी लक्ष्मीबाई गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, इंदौर के फाइन आर्ट्स विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष—और Managing Editor डॉ. टीना पोरवाल के कुशल संपादकीय मार्गदर्शन, निरंतर परिश्रम और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम मानी जा रही है। उनके संयुक्त प्रयासों से यह जर्नल अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरते हुए वैश्विक पहचान स्थापित करने में सफल रहा।
Scopus, जो Elsevier द्वारा संचालित एक प्रतिष्ठित बहुविषयक abstract और citation डेटाबेस है, विश्वभर के उच्च गुणवत्ता वाले peer-reviewed journals, पुस्तकों और conference proceedings को कवर करता है। यह मंच शोधकर्ताओं को लेखों की खोज, citations के विश्लेषण, शोध प्रभाव (जैसे CiteScore) के आकलन और अकादमिक प्रदर्शन के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस उपलब्धि का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि ‘शोधकोष’ में हिंदी भाषा में प्रकाशित शोध लेख भी Scopus में इंडेक्स हुए हैं। दृश्य एवं प्रदर्शन कला के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक कदम है, क्योंकि पहली बार हिंदी भाषा के अकादमिक शोध को इस स्तर की वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है। इससे हिंदी माध्यम में शोध करने वाले विद्वानों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान और संवाद के नए द्वार खुलेंगे।
ग्रंथालय प्रकाशन की यह सफलता भारतीय भाषाओं—विशेषकर हिंदी—में उच्च गुणवत्ता वाले शोध को वैश्विक स्तर तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी। यह उपलब्धि भविष्य में भारतीय शोधकर्ताओं, कला शिक्षकों और विद्यार्थियों को और अधिक प्रेरित करने के साथ-साथ भारतीय कला, संस्कृति और शोध परंपरा को सुदृढ़ आधार प्रदान करेगी।

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