रायपुर साहित्य उत्सव में याद किए गए छत्तीसगढ़ के गौरव: स्व. जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’

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बैम्बू पोस्ट 24 जनवरी 2026 ,बिलासपुर/रायपुर।

नवा रायपुर में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दूसरे दिन कवि-कथाकार अनिरुद्ध नीरव मंडप पर साहित्य : उपनिषद से एआई तक विषय पर केंद्रित परिचर्चा जब छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’ को समर्पित कार्यक्रम आयोजित हुआ, तो यह केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि प्रदेश की साहित्यिक आत्मा से पुनर्मिलन का क्षण था। बिलासपुर की धरती पर जन्मे इस महान विद्वान ने हिंदी साहित्य, छंदशास्त्र और काव्यशास्त्र को जो ऊँचाइयाँ दीं, वे आज भी अप्रतिम हैं।
पिंगल शास्त्र के प्रकांड आचार्य
जगन्नाथ प्रसाद ‘भानु’ को हिंदी के छंदशास्त्र का अद्वितीय विद्वान माना जाता है। उनके द्वारा रचित “पिंगल शास्त्र” केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि हिंदी छंद विज्ञान की धरोहर है। दुर्भाग्य से समय की मार से इस कृति की अनेक प्रतियाँ नष्टप्राय हो चुकी हैं।
बिलासपुर के चाँटापारा क्षेत्र में स्थित उनके पुराने निवास में इस ग्रंथ की एक जर्जर प्रति वर्षों तक सुरक्षित रही। बाद में साहित्य संरक्षण की भावना से उसे विद्वानों के पास जीर्णोद्धार हेतु सौंपा गया — यह घटना इस बात का प्रमाण है कि साहित्य केवल पुस्तकों में नहीं, लोगों की स्मृतियों में भी जीवित रहता है।
चाँटापारा का वह ऐतिहासिक घर
भानु जी का निवास बिलासपुर के चाँटापारा में था, जहाँ उनका घर स्व. ठाकुर बलराम सिंह (पूर्व विधायक) के निवास के पास की गली में स्थित था। बाद के वर्षों में उनके पौत्र मोहन दीवाना वहाँ रहा करते थे। यह स्थान केवल एक मकान नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य के इतिहास का मौन साक्षी है।
प्रशासनिक पद से स्वतंत्रता संग्राम तक
स्व. भानु केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेमी व्यक्तित्व भी थे। बिलासपुर में उच्च प्रशासनिक पद (गवर्नर पद) पर रहने के बाद भी उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम की भावना से स्वयं को जोड़े रखा। यह उनके व्यक्तित्व की बहुआयामी चेतना को दर्शाता है — विद्वान, कर्मयोगी और देशभक्त।
एक निजी स्मृति
वरिष्ठ पत्रकार केशव शुक्ला के साथ चाँटापारा स्थित उनके निवास पर एक अवसर पर जाना, वहाँ उस जर्जर ग्रंथ की प्रति देखना, और उसे संरक्षण के उद्देश्य से आगे सौंपना — यह अनुभव बताता है कि साहित्य की रक्षा केवल संस्थाएँ नहीं, संवेदनशील लोग भी करते हैं।
आज भी प्रेरणा क्यों हैं ‘भानु’?
हिंदी छंदशास्त्र को व्यवस्थित रूप दिया
पिंगल शास्त्र जैसी अमूल्य कृति
साहित्य और राष्ट्रचेतना का अद्भुत संगम
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के अग्रदूत
रायपुर साहित्य उत्सव में उनका स्मरण यह संदेश देता है कि
साहित्यकार कभी नहीं जाते — वे शब्दों, विचारों और परंपरा में जीवित रहते हैं।

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