साहित्य में भी ‘बुकिंग फुल’ का दौर 8 फरवरी को शब्दों की भिड़ंत से बचने की अपील

Spread the love

बैम्बू पोस्ट 14 जनवरी 2026 बिलासपुर।
शहर में साहित्य अब केवल रचना नहीं, तिथि प्रबंधन का विषय बनता जा रहा है। कृति कला एवं साहित्य परिषद, सीपत ने 8 फरवरी 2026 को होने वाले कृति साहित्य महोत्सव को लेकर एक ऐतिहासिक पहल की है—
“उस दिन कोई और साहित्यिक आयोजन न करे।”
सूत्रों के अनुसार परिषद का मानना है कि यदि एक ही दिन दो कवि एक ही शहर में साँस लेने लगे, तो श्रोताओं की कुर्सियाँ बँट सकती हैं और तालियों की गिनती घट सकती है। इससे साहित्यिक वातावरण में असहज मौन फैलने का ख़तरा है।
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि साहित्य प्रेमी सीमित संख्या में होते हैं और यदि वे इधर-उधर बिखर गए, तो विचारों का प्रवाह नेटवर्क एरर में चला जाएगा।
इसलिए सभी संस्थाओं से अनुरोध है कि वे उस दिन साहित्य को अवकाश दें और केवल एक ही मंच पर शब्दों को सम्मानित होने दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहला अवसर है जब साहित्यिक आयोजन के लिए नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट (NOC) की नैतिक माँग की गई है।
हालाँकि कुछ युवा कवियों ने सवाल उठाया है—
“अगर उसी दिन कविता अचानक लिखने का मन हो गया, तो क्या उसे भी स्थगित करना पड़ेगा?”
परिषद ने यह भी अपेक्षा जताई है कि अन्य संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित होकर आशीर्वाद देंगे, ताकि साहित्य को यह भरोसा हो सके कि वह अब भी सामूहिक संपत्ति है—बस तारीख़ आरक्षित है।
फिलहाल शहर के साहित्यिक कैलेंडर में 8 फरवरी को लाल स्याही से घेरा जा चुका है और कवियों को चेतावनी दी गई है—
उस दिन शब्द बोलेंगे, पर केवल तय मंच से।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *