मंत्री की फटकार और अधिकारी बेहोश—शिक्षा विभाग में ‘दक्षिणा मॉडल’ का लाइव डेमो”

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बैम्बू पोस्ट 11 दिसंबर 2025 बिलासपुर।
बिलासपुर से बैम्बू पोस्ट की विशेष रिपोर्ट

बिलासपुर-छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का एक दिवसीय प्रवास उस समय अचानक शैक्षिक संवेदना से भर उठा, जब संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कोटा के बीईओ एन.के. मिश्रा सीधे कुर्सी से उतरकर फर्श पर लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति देने लगे।
वजह? पुरानी वही—प्रश्न कठिन था, और जवाब देने से पहले ही BP ने विद्रोह कर दिया।

सूत्रों के अनुसार मंत्री ने अटैचमेंट मुद्दे पर पूछताछ शुरू ही की थी कि बीईओ साहब पर ऐसी फटकार गिरी, जैसे विभाग की पुरानी फाइलें अचानक अलमारी से गिर पड़ें। चेतावनी सुनते ही उनका ब्लड प्रेशर आसमान छूने लगा और वे ज़मीन की ओर झुकते हुए सीधे बेहोशी के पाठ्यक्रम में प्रवेश कर गए।
बैठक कक्ष में तुरंत अफरा–तफरी का माहौल हो गया—जैसे यूँ लगे कि युक्तियुक्तकरण पोर्टल ने फिर से काम करना बंद कर दिया हो।

अधिकारी को जल्दबाज़ी में बाहर लाया गया और अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ उनकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है—शुक्र है कि शिक्षा विभाग स्थिर नहीं है, नहीं तो कोई ख़बर बनती ही नहीं।

इधर बैठक थोड़ी देर के लिए रोकी गई, लेकिन शिक्षा सुधार का सत्र पुनः आरंभ हो गया। अफसोस, बैम्बू पोस्ट का संवाददाता मौके पर नहीं पहुंच सका, वरना शायद एकाध सवाल पूछ लेता और दो-चार BP और बढ़वा देता।

उधर, याद दिला दें कि बैम्बू पोस्ट ने विगत दिनों जो समाचार प्रकाशित किया था, वह अब किसी सरकारी सत्यापन से कम लोकप्रिय नहीं—
कि शिक्षा विभाग में पढ़ाई कम और पढ़वाने का धंधा ज्यादा फल-फूल रहा है। नियुक्ति से लेकर पसंदीदा स्कूल तक की यात्रा अब किताबों से नहीं, “योगदान सूची” से तय होती है।
9 साल से एक ही पाठ पढ़ाया जा रहा है—योग्यता बाद में, दक्षिणा पहले।
सूत्र कहते हैं कि लगभग 1000 करोड़ रुपये दक्षिणा के रूप में शिक्षकों की जेब से निकलकर ‘व्यवस्था’ की गोद में समा चुके हैं। शिक्षा का मंदिर कब करेंसी काउंटर में बदला—किसी को पता ही नहीं चला।

सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही खड़ा है—
क्या यह भ्रष्टाचार का युक्तियुक्तकरण है, या युक्तियुक्तकरण का भ्रष्टाचार?
क्योंकि छत्तीसगढ़ में शिक्षा आज बच्चों को नहीं, बल्कि सिस्टम को पढ़ा रही है—
कैसे हर तबादला बने एक कारोबार,
हर नियुक्ति कमाई का अवसर,
और हर बैठक… BP बढ़ाने वाली घटना।

बाकी, शिक्षा मंत्री का प्रवास सफल बताया गया है—क्योंकि कम से कम एक अधिकारी तो तुरंत परिणाम देकर दिखा गया।

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