
बैम्बू पोस्ट 13 फरवरी 2026 बिलासपुर
शहर के एक संस्कारी और स्वयंभू “हाई-टेक” मोहल्ले में इन दिनों सबसे बड़ा संकट न पानी का है, न सड़क का—बल्कि “अबड़ सुघर सीसीटीवी” के अचानक समाधि ले लेने का है।
बताया जाता है कि यह कैमरा पहले टुकुर-टुकुर ऐसी नजर रखता था मानो मोहल्ले का अनौपचारिक दामाद हो—सब पर बराबर ध्यान। पर जैसे ही उसने आंख मूंदी, गली की राजनीति से लेकर प्रेम-कथा तक सबकी धड़कन तेज हो गई।
चाय दुकान पर बैठे विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला—
“देश की सुरक्षा बाद मं, पहिली हमर गली के सुरक्षा देखव!”
बुजुर्ग वर्ग का मानना है कि कैमरा बंद होते ही अनुशासन छुट्टी पर चला गया।
“पहिले जऊन लइका सीधे चलत रहिस, अब मोबाइल देखत टेढ़ा चलत हे,” एक ददा ने गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत किया।
वहीं युवा वर्ग की चिंता राष्ट्रव्यापी मुद्दों से भी गंभीर है। वेलेंटाइन डे सिर पर है और कैमरा बंद!
एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“कैमरा चालू रहित त कम से कम फोटो मिल जातिस… अब तो गुलाब देबो त सबूत काबर?”
महिलाओं ने भी संतुलित प्रतिक्रिया दी—
“कैमरा चालू रहित त निगरानी रहिथे, बंद हो गे त अफवाह बढ़थे!”
स्थानीय समिति ने आश्वासन दिया है कि तकनीकी टीम वायरिंग में जान फूंकने में लगी है। बिजली विभाग भी इस ऐतिहासिक संकट को गंभीरता से ले रहा है—क्योंकि मोहल्ले का मनोबल अब तार से ही जुड़ा है।
इस बीच, बच्चों और युवाओं ने स्थिति पर एक नया नारा गढ़ लिया है—
“रोड बनही बाद मं, पहिली कैमरा चालू करव!”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना हमें याद दिलाती है—
हम सुरक्षित कम, रिकॉर्ड ज़्यादा होना चाहते हैं।
फिलहाल मोहल्ला इंतजार में है—
कि कैमरा फिर से टुकुर-टुकुर ताके,
और लोग फिर से सीधे चलना याद करें।
