
बैम्बू पोस्ट अप्रैल 2026 बीजापुर (छत्तीसगढ़)।
सुदूर आदिवासी क्षेत्र बीजापुर के जिला अस्पताल ने एक उल्लेखनीय चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। यहां विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ और गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन दिया गया।
ग्राम कोरसागुड़ा (विकासखंड उसूर) निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया। इस बीमारी में त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे जीवन को गंभीर खतरा होता है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी और विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक त्वचा की सुरक्षा के लिए पारंपरिक और सहायक उपाय अपनाए गए। विशेष रूप से स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग बिस्तर के रूप में किया गया, जिससे त्वचा पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। नियमित अंतराल पर पत्तों को बदलकर स्वच्छता भी सुनिश्चित की गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी और सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफल रहा। इस उपलब्धि में कलेक्टर संबित मिश्रा और जिला पंचायत सीईओ नम्रता चौबे के प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर बताया कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की समर्पित सेवा ने चमत्कार कर दिखाया। उन्होंने पूरे चिकित्सा दल के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अब दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। बीजापुर जिला अस्पताल का SNCU अब क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।
बीजापुर में चिकित्सा चमत्कार: दुर्लभ बीमारी से जूझते नवजात को मिला नया जीवन
