
बैम्बू पोस्ट 14 फरवरी 2026 बिलासपुर।
मंगल विहार की छत से
वेलेंटाइन डे आते ही शहर में अपराध का नया ट्रेंड शुरू हो गया है—दिल चोरी!
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस साल गुलाब कम, एहसास ज़्यादा गायब हुए हैं। छतों पर कैमरे तो लगे हैं, पर कैमरा एंगल ऐसा कि बस कपड़े उड़ते दिखते हैं, दिल उड़ते नहीं दिखते।
पीड़ित युवक ने थाने में आवेदन दिया—
“सर, मेरा दिल कल शाम से लापता है। आख़िरी बार उसे लाल दुपट्टे की छाँव में देखा गया था।”
थाना प्रभारी ने गंभीरता से पूछा—
“कोई संदिग्ध?”
युवक बोला—
“जी, मुस्कान थी… और आवाज़ में शहद। CCTV में कुछ नहीं दिखा, पर बादल गवाह हैं।”
पुलिस ने जवाब दिया—
“बादल से लिखित बयान लाओ, तब एफआईआर दर्ज होगी।”
कैमरा एंगल की साज़िश
छत पर लगे कैमरे केवल हवा की चाल पकड़ पाए।
दिल जब उड़कर गया, कैमरा उस दिशा में नहीं था।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है—
“दिल की चोरी हाई-रिज़ॉल्यूशन में नहीं पकड़ी जा सकती, यह भावनात्मक नेटवर्क पर होती है।”
कुछ समाजसेवियों ने मांग की है कि अब से हर छत पर “भावनात्मक सीसीटीवी” लगाए जाएँ, जो धड़कनों की गति रिकॉर्ड करें।
वारदात की बढ़ती संख्या
इस वेलेंटाइन सप्ताह में:
12 दिल संदिग्ध परिस्थितियों में गायब
7 मामलों में गुलाब बरामद, दिल नहीं
3 मामलों में आरोपी ने खाली लिफ़ाफ़ा छोड़ दिया
एक बुज़ुर्ग दार्शनिक ने कहा—
“दिल चोरी नहीं होता, स्वेच्छा से स्थानांतरित होता है।
यह भारतीय दंड संहिता नहीं, प्रेम संहिता का मामला है।”
आखिर रिपोर्ट कहां लिखाएँ?
थाना, कचहरी, या सीधे उसकी आँखों में?
कानून कहता है—सबूत लाओ।
प्रेम कहता है—साहस लाओ।
इस संवाददाता की अंतिम टिप्पणी:
दिल की चोरी में अपराधी और पीड़ित दोनों मुस्कुराते पाए गए।
कैमरा एंगल भले न पकड़ पाए,
पर चाँदनी की अदालत में हर बयान दर्ज हो जाता है।
वेलेंटाइन डे पर सावधान रहें—
अपना दिल संभालकर रखें,
या फिर…
अगर देना ही है, तो रसीद मत मांगिए।
