प्रशासन की देर से खुली नींद: जब खाली हो गई जेब, तब आया किताबों पर लगाम का आदेश

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​बैम्बू पोस्ट 24 अप्रैल 2026 बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों और कमीशनखोरी पर लगाम लगाने के लिए जारी ताजा निर्देश “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत” वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने यह आदेश उस समय जारी किया है, जब प्रदेश के अधिकांश निजी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए लगभग एक पखवाड़ा बीत चुका है और 90% से अधिक अभिभावक भारी-भरकम कीमतों पर किताबें और स्टेशनरी खरीद चुके हैं।
​आदेश में क्या है?
​मुख्य सचिव द्वारा जारी इस निर्देश में स्पष्ट कहा गया है कि:
​NCERT/SCERT अनिवार्य: कक्षा 1 से 8वीं तक के बच्चों के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों के बजाय NCERT/SCERT की पुस्तकें लागू की जाएं।
​दबाव पर रोक: किसी भी अभिभावक को विशेष दुकान से ही किताब, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य न किया जाए।
​पारदर्शी प्रणाली: शिकायतों के निपटारे के लिए एक पारदर्शी सिस्टम बनाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो।
​अभिभावकों का दर्द: “अब इस आदेश का क्या करें?”
​अभिभावकों में इस आदेश को लेकर भारी आक्रोश है। उनका तर्क है कि अप्रैल का महीना खत्म होने को है, स्कूलों ने सत्र की शुरुआत में ही अपनी चुनिंदा दुकानों की लिस्ट थमा दी थी। दुकानदारों और स्कूलों की सांठगांठ के चलते अभिभावकों ने पहले ही 5,000 से 15,000 रुपये तक का सेट खरीद लिया है।
​”जब हम अपनी पूरी बचत किताबों और यूनिफॉर्म पर खर्च कर चुके हैं, तब सरकार यह आदेश निकाल रही है। क्या सरकार अब हमारे पैसे वापस करवाएगी?” — एक पीड़ित अभिभावक
​कार्रवाई की खानापूर्ति पर सवाल
​शिक्षा विभाग के इस विलंबित कदम ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि यह आदेश फरवरी या मार्च के महीने में आया होता, तो इसका लाभ आम जनता को मिलता। अब जबकि बाजार में करोड़ों का कारोबार हो चुका है, यह निर्देश केवल एक कागजी खानापूर्ति नजर आता है।
​अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन उन स्कूलों पर कोई वास्तविक कार्रवाई करता है जिन्होंने पहले ही पालकों को लूट लिया है, या यह आदेश भी पिछले वर्षों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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