
बैम्बू पोस्ट 12 मार्च 2026बिलासपुर।
एक तरफ जिला प्रशासन का दावा है कि शहर में घरेलू एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति है और घबराने की कोई जरूरत नहीं, वहीं दूसरी तरफ शहर के कई होटलों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं और मेन्यू कार्ड गर्म हो चुके हैं। कुछ होटल तो सीधे-सीधे बंद हैं, जबकि कई ने नए-नए “महंगे आइटम” खोज निकाले हैं — शायद यह भी गैस संकट का ही एक रचनात्मक समाधान है।
जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने खाद्य विभाग और गैस वितरकों की बैठक लेकर भरोसा दिलाया कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है। आंकड़े भी दमदार बताए गए — लगभग 4.80 लाख घरेलू कनेक्शन, 38 गैस वितरक, और प्रतिदिन करीब 5 हजार सिलेंडरों की डिलीवरी। प्रशासन की नजर में व्यवस्था इतनी सुचारु है कि उपभोक्ताओं को पैनिक में आकर सिलेंडर जमा करने की कोई जरूरत नहीं।
लेकिन शहर की गलियों में कहानी थोड़ी अलग सुनाई दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक कई जगहों पर सिलेंडरों की जमाखोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। कुछ लोगों के घरों में एक-दो नहीं, बल्कि “छोटा गैस गोदाम” तैयार हो चुका है। नतीजा यह कि आम आदमी के हिस्से में चिंता, अफवाह और लंबी प्रतीक्षा ही आ रही है।
इधर होटल संचालकों का दर्द भी कम दिलचस्प नहीं है। व्यवसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल बंद होने से कई होटलों के चूल्हे बुझ गए हैं। कुछ होटल मालिकों ने समाधान भी निकाल लिया है — मेन्यू में दाम बढ़ा दो और गैस संकट को “महंगाई स्पेशल” बना दो। ग्राहक पूछे तो जवाब मिलता है, “साहब, गैस नहीं है… और जो है, वो बहुत महंगी है।”
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा उलझन आम आदमी की है। प्रशासन कह रहा है “सब सामान्य है”, जबकि मोहल्लों में चर्चा है कि “कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है”। ऊपर से जमाखोरी और संभावित अग्नि दुर्घटनाओं का खतरा अलग मंडरा रहा है।
नतीजा यह कि शहर में सिलेंडर से ज्यादा अफवाहें घूम रही हैं और आम आदमी की रातों की नींद उड़ चुकी है।
लोग अब मज़ाक में कहने लगे हैं —
“बिलासपुर में गैस की कमी नहीं है,
बस पता नहीं चल रहा कि गैस है कहाँ!”
अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा तीखा, अख़बार की खोजी या कटाक्ष भरी रिपोर्टिंग में भी ढाल सकता हूँ, ताकि यह सीधे अखबार के पहले पेज पर छपने लायक बन जाए।
गैस पर्याप्त, मगर होटल ठप्प — बिलासपुर में सिलेंडर की ‘अदृश्य लीला’!”
