भविष्य निधि राशि गबन का मामला हाई कोर्ट पहुँचा, राज्य शासन से जवाब तलब

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बैम्बू पोस्ट 19 मई 2026 बिलासपुर।
संजय पाण्डेय द्वारा भविष्य निधि (सीजीपीएफ) की राशि खाते में जमा नहीं किए जाने का मामला अब उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ पहुँच गया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य शासन को चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 30 जून को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता व्याख्याता संजय पाण्डेय ने न्यायालय को बताया कि उनके वेतन से प्रतिमाह सीजीपीएफ की राशि नियमित रूप से काटी जाती रही, लेकिन वह राशि उनके सीजीपीएफ खाते में जमा नहीं की गई। इस संबंध में उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य जयप्रकाश ओझा को कई बार लिखित आवेदन दिए, परंतु न तो राशि का विवरण उपलब्ध कराया गया और न ही कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।
याचिका के अनुसार, कोषालय में चालान के माध्यम से जमा की गई राशि की जानकारी और चालान प्रतियां मांगे जाने पर भी प्राचार्य ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। यहां तक कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। आरोप है कि अपीलीय अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने भी मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
व्याख्याता ने मामले की शिकायत कलेक्टर बिलासपुर, संयुक्त संचालक शिक्षा रामायण प्रसाद आदित्य तथा लोक शिक्षण संचालनालय को भी दी थी, लेकिन समाधान नहीं होने पर उन्होंने स्वयं उच्च न्यायालय में उपस्थित होकर अपनी भविष्य निधि राशि वास्तविक ब्याज सहित दिलाने की मांग की।
मामले की सुनवाई के दौरान विभु दत्त गुरु की पीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि याचिकाकर्ता के वेतन से राशि कटने के बावजूद वह खाते में जमा नहीं हुई है। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन को विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
राज्य शासन और कलेक्टर बिलासपुर की ओर से अधिवक्ता सुयशधर बड़गंइया ने पक्ष रखा।
शिक्षा विभाग में यह मामला लंबे समय से चर्चा में होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उच्च अधिकारियों के संरक्षण के कारण मामला लंबा खिंचता गया, जिससे विभाग की छवि प्रभावित हो रही है।

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