
छाया:शिरीष डामरे
रिपोर्टिंग:अंजनी कुमार तिवारी
बैम्बू पोस्ट 21 नवम्बर 2025।
छत्तीसगढ़ सरकार ने बिलासपुर जिले में स्थित प्राकृतिक कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल (Ramsar Site) के रूप में सूचीबद्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। यह कदम राज्य की आर्द्रभूमियों के संरक्षण, उनके सतत उपयोग और पर्यावरणीय महत्त्व को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
रामसर स्थल क्या है?
रामसर कन्वेंशन वर्ष 1971 में ईरान के शहर रामसर में संपन्न एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य विश्वभर की आर्द्रभूमियों का संरक्षण एवं विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। इस कन्वेंशन के तहत सूचीबद्ध स्थलों को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का दर्जा प्राप्त होता है।

कोपरा जलाशय की विशेषताएँ
कोपरा जलाशय अनेक प्राकृतिक एवं मौसमी जलवाहिनियों से पोषित होता है, जिससे यहाँ का जल स्तर और पारिस्थितिकी तंत्र समृद्ध है। इन जलवाहिकाओं द्वारा लाई गई उर्वर तलछट जलाशय के आसपास की भूमि को अत्यंत उपजाऊ बनाती है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ स्थानीय कृषक समुदाय को प्राप्त होता है।
यह क्षेत्र पक्षियों, जलचर प्रजातियों और जैवविविधता के लिए अनुकूल आवास प्रदान करता है, जो इसे रामसर स्थल के मानकों के अनुरूप बनाते हैं।

भारत में रामसर स्थलों की बढ़ती संख्या
भारत में रामसर स्थलों की सूची लगातार विस्तृत हो रही है। हाल ही में बिहार की गोगाबिल झील को देश का 94वां रामसर स्थल घोषित किया गया था। कोपरा जलाशय भी इसी क्रम में देश की पर्यावरण-संरक्षण नीति को सुदृढ़ करने में योगदान दे सकता है।
‘रामसर’ शब्द की वैकल्पिक व्याख्या पर सांस्कृतिक दृष्टि
यद्यपि ‘रामसर’ ईरान का भौगोलिक नाम है, किंतु कुछ विद्वानों द्वारा इसकी ध्वन्यात्मक व्याख्या ‘राम’ और ‘सर’ (सरोवर/सरिता) से जोड़कर प्राचीन सनातन परंपराओं एवं सांस्कृतिक संबंधों की ओर संकेत प्राप्त होते हैं।
ऐतिहासिक अध्ययन यह दर्शाते हैं कि ईरान का प्राचीन क्षेत्र आर्यों, सूर्योपासकों एवं याज्ञिक परंपराओं का केंद्र रहा है। अंग नरेश कर्ण द्वारा सूर्य उपासना के प्रसार, कर्णेश्वर सूर्य मंदिरों की स्थापना तथा सूर्य षष्ठी व्रत की परंपरा को भी इसी ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाता है।
छत्तीसगढ़ के सिहावा क्षेत्र में स्थित प्राचीन कर्णेश्वर सूर्य मंदिर भी इसी सांस्कृतिक कड़ी का प्रमाण है।
सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल
राज्य सरकार की यह पहल केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और स्थापित करने के लिए भी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रस्ताव में रामसर स्थल के प्रतीकात्मक महत्व को ‘राम’ और ‘सर’ के वैदिक अर्थों से जोड़ते हुए, दक्षिण कोसल एवं माता कोशल्या के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव को भी वैश्विक स्तर पर उभारने की संभावना व्यक्त की गई है।
यदि कोपरा जलाशय को रामसर स्थल का दर्जा मिल जाता है, तो यह न केवल छत्तीसगढ़ के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय पहचान देगा, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक–सांस्कृतिक धरोहर को भी नई प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। यह पहल प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक विरासत—दोनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
