
बैम्बू पोस्ट 09मार्च 2026 बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
मुकुंदपुर में एक शादी की खुशियाँ अचानक मातम जैसी बेचैनी में बदल गईं, जब दावत खाने के बाद करीब 25 लोग फूड पॉइजनिंग के शिकार हो गए। सभी को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मस्तूरी में भर्ती कराया गया, जहाँ पहले से सीमित संसाधनों के बीच मरीजों की भीड़ ने अस्पताल की व्यवस्था की असल तस्वीर भी सामने ला दी।
मुकुंदपुर में हुई एक शादी में परोसी गई दावत मेहमानों के लिए मुसीबत बन गई। खाना खाने के कुछ ही घंटों बाद लोगों को उल्टी, दस्त और कमजोरी की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते करीब 25 लोग बीमार पड़ गए, जिन्हें आनन-फानन में मस्तूरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया।

बीमारों में 8 लड़कियाँ, 4 लड़के और 2 पुरुष शामिल हैं, जबकि बाकी महिलाएँ हैं। अस्पताल के वार्ड में एक ही कमरे में कई परिवार बैठे दिखे—कहीं बच्चे सलाईन के साथ लेटे हैं, तो कहीं परिजन चिंता में उनके सिरहाने बैठे हैं।
लेकिन इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए। करीब 30 बेड वाले इस अस्पताल में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से अव्यवस्था की स्थिति बन गई। कई मरीजों को एक्स्ट्रा बेड और स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज करना पड़ा।
अस्पताल की हालत ऐसी दिखी मानो व्यवस्था खुद ही आईसीयू में हो। पूरे वार्ड की जिम्मेदारी कुछ गिनी-चुनी नर्सों के भरोसे चलती दिखाई दी, जो लगातार मरीजों को सलाईन चढ़ाने और दवाइयाँ देने में जुटी रहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के इस अस्पताल में पहले से ही डॉक्टर और स्टाफ की कमी है। अचानक बड़ी संख्या में मरीज आने पर व्यवस्थाएँ चरमरा जाती हैं।
व्यंग्य यह है कि शादी में मेहमानों के लिए दावत तो भरपूर थी, लेकिन अस्पताल में इलाज के लिए संसाधन सीमित निकले।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है और सभी का इलाज जारी है। साथ ही फूड पॉइजनिंग के कारणों की जांच की जा रही है।

शादी की दावत में परोसी गई थाली ने लोगों को अस्पताल पहुँचा दिया, लेकिन इस घटना ने एक और सच्चाई उजागर कर दी—
गाँवों में स्वास्थ्य व्यवस्था कभी-कभी खुद ही ‘इलाज’ की जरूरत में नजर आती है।
