
बैम्बू पोस्ट | 11 फरवरी 2026 | बिलासपुर, छत्तीसगढ़
राजीव विहार की एक बहुमंज़िला इमारत में सुरक्षा व्यवस्था ने ऐसा कमाल दिखाया है कि अब चोरों को भी आत्मविश्वास आ गया है। सीसीटीवी कैमरे पूरे जोश में रिकॉर्डिंग कर रहे थे, धूप अपने तय समय पर ड्यूटी निभा रही थी, और छत पर सात गोभियों के टुकड़े तपकर अचार-योग्य बनने की दिशा में अग्रसर थे। तभी लोकतंत्र की तरह खुली छत से एक अनजान ‘सब्ज़ी-समर्थक’ आया, गोभियाँ समेटीं और लोकतांत्रिक ढंग से चलता बना।
तकनीक ने सब कुछ देखा। कैमरों ने कोई भेदभाव नहीं किया—गोभी को भी उतनी ही गंभीरता से रिकॉर्ड किया जितनी आमतौर पर कार पार्किंग को। फर्क बस इतना रहा कि कार वहीं रही, गोभी नहीं।
घटना दिन-दहाड़े हुई—यानी अपराधी ने पारदर्शिता में विश्वास रखा। जाते-जाते वह वह कपड़ा वहीं छोड़ गया, जिस पर गोभियाँ सुखाई जा रही थीं। विशेषज्ञ इसे “नैतिक चोरी” की श्रेणी में रख रहे हैं—सामान ले जाओ, आधार छोड़ जाओ। कपड़ा अब ‘मुख्य गवाह’ है और संभवतः जल्द ही उससे पूछताछ भी हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि फुटेज खंगाली जा रही है। निवासी टीवी स्क्रीन पर ऐसे जुटे हैं मानो कोई वेब सीरीज़ रिलीज़ हुई हो—“गोभी: द अनकट वर्ज़न”। सुरक्षा समिति ने इसे गंभीरता से लिया है। कहा जा रहा है कि भविष्य में छत पर सब्ज़ी रखने से पहले एंट्री रजिस्टर, ओटीपी सत्यापन और संभव हुआ तो गोभी के लिए भी फेस रिकग्निशन लागू किया जाएगा।
कुछ निवासियों को संदेह है कि यह “गोभी गैंग” की संगठित साज़िश है—एक ऐसा गिरोह जो सलाद से लेकर सब्ज़ी तक में सक्रिय है। वहीं महंगाई विशेषज्ञ इसे ‘सब्ज़ी आपातकाल’ की शुरुआती दस्तक बता रहे हैं। एक वरिष्ठ निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “पहले मोबाइल और बाइक जाते थे, अब गोभी भी सुरक्षित नहीं। अगली बार शायद लौकी की बारी हो!”
घटना ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या गोभी को भी अब सुरक्षा बीमा मिलेगा?
क्या छत पर धूप सेंकना अब जोखिम भरा पेशा है?
और क्या चोरों के लिए सीसीटीवी सिर्फ रियलिटी शो है?
फिलहाल सात गोभियों के टुकड़ों की तलाश जारी है। कपड़ा बरामद है, कैमरे सक्रिय हैं, और निवासी सजग हैं। राजीव विहार ने एक बार फिर साबित कर दिया है—जहाँ सुरक्षा कड़ी होती है, वहाँ कहानी और भी कड़क निकलती है… बस गोभी नरम पड़ जाती है।
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