
बैम्बू पोस्ट 12 जून 2026 बिलासपुर।
यह केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं, बल्कि दशकों की तपस्या, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति अटूट निष्ठा का अभिनंदन है। छत्तीसगढ़ और रायगढ़ कथक घराने के लिए गर्व और भावनाओं से भरा यह ऐतिहासिक क्षण तब साकार होने जा रहा है, जब पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ कथकाचार्य पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च उपाधि “अकादमी रत्न” से अलंकृत किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित सम्मान स्वयं भारत के राष्ट्रपति के करकमलों से प्रदान किया जाएगा।
रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक पंडित रामलाल बरेठ ने अपना पूरा जीवन कला साधना को समर्पित कर दिया। रायगढ़ की धरती पर जन्मे इस महान कलाकार ने राजा चक्रधर सिंह और अपने पिता पंडित कार्तिक राम के सान्निध्य में कथक की बारीकियों को सीखा और उसे अपनी अथक मेहनत से नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
उनकी साधना केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर रायगढ़ घराने की गरिमा को स्थापित किया और अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुँचाया। आज उनके अनगिनत शिष्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रायगढ़ कथक घराने की समृद्ध परंपरा का ध्वज गर्व से फहरा रहे हैं।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रीडर और चक्रधर नृत्य केंद्र में तीन दशकों तक गुरु के रूप में सेवा देते हुए उन्होंने न केवल नृत्य सिखाया, बल्कि संस्कार, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण की अमूल्य विरासत भी अपने शिष्यों को सौंपी।
पद्मश्री, चक्रधर सम्मान, शिखर सम्मान और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे अनेक अलंकरणों से सम्मानित पंडित रामलाल बरेठ के लिए “अकादमी रत्न” सम्मान उनके कला जीवन की एक और स्वर्णिम उपलब्धि है। यह सम्मान उस कलाकार के संघर्ष, समर्पण और साधना को राष्ट्रीय स्तर पर मिली सर्वोच्च स्वीकृति है, जिसने जीवन भर भारतीय संस्कृति की सेवा को अपना धर्म माना।
इस अवसर पर डॉ. विनय पाठक ने कहा कि पंडित रामलाल बरेठ का योगदान केवल रायगढ़ घराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने नृत्य, नाटक और संगीत की परंपराओं को नई ऊर्जा प्रदान की है। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि बरेठ परिवार की चार पीढ़ियाँ आज भी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
पूर्व आईएसएस अधिकारी डॉ. रमेशचन्द्र श्रीवास्तव ने इसे पूरे छत्तीसगढ़, बिलासपुर और रायगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि पंडित बरेठ की उपलब्धियाँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेंगी।
भावुक क्षण तब आया जब उनके पुत्र, कथक गुरु और नर्तक भूपेंद्र बरेठ ने अपने पिता के संघर्ष और समर्पण को याद करते हुए कहा कि यह सम्मान दशकों की तपस्या, त्याग और कला के प्रति अटूट प्रेम का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि से रायगढ़ घराने की पहचान और अधिक सशक्त होगी तथा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई प्रतिष्ठा मिलेगी।
वास्तव में, यह सम्मान केवल पंडित रामलाल बरेठ का नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान है, जिसने पीढ़ियों से भारतीय कला की आत्मा को जीवित रखा है।
