उत्तर की प्रतीक्षा में प्रश्न — अभिनेता रघुवीर यादव से एक अधूरी मुलाक़ात

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बैम्बू पोस्ट 30 जून 2026 बिलासपुर।
29 जून को चार दिवसीय ‘योगेश स्मृति समारोह’ के दौरान मैं होटल ईस्ट पार्क, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) पहुँचा। उद्देश्य केवल एक था—रंगमंच और समाज से जुड़े कुछ गंभीर प्रश्नों पर अभिनेता रघुवीर यादव से बैम्बू पोस्ट के लिए बातचीत करना।
होटल के प्रवेश द्वार पर मौजूद एक महिला ने विनम्रता से बताया कि अभी मुलाक़ात संभव नहीं है। उनके व्यवहार से लगा कि वे आयोजकों के निर्देशों का पालन कर रही थीं। मैंने इसे सहजता से स्वीकार किया और समारोह के ‘अग्रज नाट्य दल’ के मुख्य संचालक श्री सुनील चिपड़े जी से फ़ोन पर संपर्क किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि जैसे ही रघुवीर यादव होटल लौटेंगे, मुझे फ़ोन कर बुलाया जाएगा।
दिन बीत गया। प्रतीक्षा भी। शाम 5:19 बजे एक मिस्ड कॉल ज़रूर आया। मैंने तुरंत वापस फ़ोन किया, लेकिन उत्तर मिला कि कॉल गलती से लग गया था।
कई बार पत्रकार की सबसे बड़ी पूँजी उसका धैर्य होता है। उस दिन मेरे पास धैर्य भी था और प्रश्न भी। अफ़सोस, प्रश्न सामने नहीं पहुँच सके। वे अब भी अपने उत्तर तलाश रहे हैं।
मैं रघुवीर यादव से जानना चाहता था कि संघर्ष उनके लिए क्या मायने रखता है; आज के समय में रंगमंच की प्रासंगिकता क्या है; क्या उन्होंने कभी थिएटर के माध्यम से किसी सामाजिक बदलाव को अपनी आँखों से घटित होते देखा है; सफलता पाने के बाद वे अपने उन साथियों के साथ किस तरह जुड़े हैं जो पीछे छूट गए; थिएटर मनोरंजन, ज्ञान और सामाजिक चेतना के बीच किस भूमिका में सबसे अधिक सार्थक है; मंच पर दिखने वाले कलाकारों और नेपथ्य में काम करने वालों के सम्मान के अंतर को वे कैसे देखते हैं; और अंततः, थिएटर में स्त्री-पुरुषों के साथ काम करने को लेकर समाज की धारणाओं पर उनकी क्या राय है।
हो सकता है किसी कलाकार के पास समय कम हो, कार्यक्रम व्यस्त हों और व्यवस्थाओं की अपनी सीमाएँ हों। फिर भी संवाद का अवसर यदि छूट जाए, तो सबसे अधिक निराश वे प्रश्न होते हैं जो समाज की ओर से पूछे जाने थे।
यह रिपोर्ट किसी शिकायत की नहीं, बल्कि उस अधूरी बातचीत की है जो अभी होनी बाकी है। उम्मीद है कि किसी अगले अवसर पर ये प्रश्न अभिनेता रघुवीर यादव तक पहुँचेंगे और उनके उत्तर केवल एक पत्रकार की जिज्ञासा ही नहीं, बल्कि रंगमंच से जुड़े असंख्य लोगों की जिज्ञासा को भी संतुष्ट करेंगे। तब तक ये प्रश्न अपनी गरिमा और धैर्य के साथ उत्तर की प्रतीक्षा में हैं।

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