
बैम्बू पोस्ट 07/07/2026रायपुर। वंदे मातरम् गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “राष्ट्रकवि की अवधारणा और भारत के राष्ट्रकवि” विषय पर एक राष्ट्रीय साहित्यिक अनुसंधान अभियान आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत देशभर के शोधार्थियों, प्राध्यापकों, साहित्यकारों एवं शोधकर्ताओं से शोधलेख आमंत्रित किए गए हैं। शोधलेख भेजने की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
आयोजकों द्वारा जारी विषय सूची में राष्ट्रकवि की अवधारणा, भारतीय साहित्य में राष्ट्रकाव्य की परंपरा, राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्य, शिक्षा, वैश्वीकरण, डिजिटल युग में राष्ट्रकाव्य तथा भारतीय भाषाओं के राष्ट्रकवियों पर कुल 50 शोध विषय शामिल किए गए हैं।
विशेष बात यह है कि शोध के लिए जिन साहित्यकारों का चयन किया गया है, उनमें राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। उनके काव्य में राष्ट्रीय चिंतन पर शोध का अलग विषय निर्धारित किया गया है। इसके अलावा बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, रवीन्द्रनाथ टैगोर, मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, सोहनलाल द्विवेदी, श्रीकृष्ण सरल, कवि प्रदीप, सुब्रह्मण्य भारती, कुवेंपु, पाश, जी. एस. शिवरुद्रप्पा सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रकवियों के साहित्य पर भी शोध किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार शोधलेख लगभग 2000 शब्द या उससे अधिक का होना चाहिए तथा वह मौलिक, अप्रकाशित एवं संदर्भ सहित तैयार किया जाना आवश्यक है। चयनित शोधलेखों को ISBN युक्त पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने की योजना है। इस साहित्यिक पहल का उद्देश्य राष्ट्रकाव्य की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा भारतीय राष्ट्रीय चेतना से जुड़े साहित्य पर गंभीर अकादमिक विमर्श को प्रोत्साहित करना है।
