
बैम्बू पोस्ट 15 जुलाई 2026 बिलासपुर/ रायपुर/बस्तर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और तस्करी के मामले को लेकर ध्यानाकर्षण सूचना पर सरकार ने विस्तृत जवाब दिया। सरकार ने विपक्ष के कई आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है और अब तक 41 आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ कई अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।
सरकार के अनुसार, दंतेवाड़ा वनमंडल में 17 मार्च 2026 को दर्ज एक प्रकरण में एक बाघ की खाल बरामद हुई थी। आरोपी से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ी। इसके बाद 29 जून 2026 को मुखबिर की सूचना पर कांकेर जिले में संयुक्त टीम ने दो लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और एक मोटरसाइकिल जब्त की गई।
पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में एक महाराष्ट्र पुलिस का सिपाही और दूसरा पुलिस का गोपनीय मुखबिर था। घटना की जानकारी महाराष्ट्र पुलिस को भी दी गई, जिसके बाद संबंधित सिपाही को निलंबित कर दिया गया और मुखबिर को सेवा से हटा दिया गया।
वन विभाग ने केवल गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी। आरोपियों की निशानदेही पर बीजापुर जिले के नेतानार क्षेत्र में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें शिकार में प्रयुक्त फंदे, चाकू, नाखून, कैनाइन दांत तथा इंद्रावती नदी किनारे छिपाकर रखी गई एक और बाघ की खाल बरामद की गई। वैज्ञानिक परीक्षण के लिए नमूने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं।
सरकार ने बताया कि इस पूरे मामले में अब तक कुल 5 प्रकरण दर्ज, 6 बाघों की खाल जब्त तथा 41 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वर्ष 2024 में एक, वर्ष 2025 में एक तथा वर्ष 2026 में तीन प्रकरण दर्ज हुए हैं।
जांच में लापरवाही पाए जाने पर वन विभाग ने तत्काल प्रभाव से लोकसेवकों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए परिक्षेत्र अधिकारी, उपवन क्षेत्रपाल, वनरक्षक और वनपाल सहित कई कर्मचारियों को निलंबित किया है।
विधानसभा में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की ओर से जारी अलर्ट के बाद विभाग ने सभी मैदानी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए थे और लगातार निगरानी की जा रही थी। सरकार ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया कि विभाग निष्क्रिय रहा या सरकार के कार्यकाल में सात-आठ बाघों के शिकार की घटनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार का कहना है कि बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगलों में लगातार “एंटी-स्नेयर वॉक” अभियान चलाया जा रहा है, ताकि शिकारी द्वारा लगाए गए फंदों को समय रहते नष्ट किया जा सके। सरकार ने दावा किया कि अपराधियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ की गई त्वरित एवं कठोर कार्रवाई से वन्यजीव संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है।
