
बैम्बू पोस्ट 06 मई 2026 बिलासपुर।
कल आई आंधी-तूफान ने जहां आम जनता को गर्मी से थोड़ी राहत दी, वहीं बिजली ठेकेदारों की ‘मजबूत व्यवस्था’ की असलियत भी सरेआम खोल दी। राजकिशोर नगर व्यवसायिक परिसर में लगे बिजली के खंभे और तारों की हालत देखकर ऐसा लग रहा है मानो वे पहले से ही गिरने के मौके की तलाश में थे — बस हवा का एक बहाना चाहिए था।
तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि एक विशाल पेड़ और बिजली के पोल मानो आपस में गले मिलकर धरती माता की गोद में विश्राम कर रहे हैं। स्थानीय लोग व्यंग्य में कह रहे हैं कि “इतनी मजबूत फिटिंग थी कि हवा ने आते ही उसे आराम दे दिया।”
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज हवा चली, पेड़ हिला… और फिर पूरा सिस्टम ऐसे बैठ गया जैसे किसी ने ‘ऑफ’ का बटन दबा दिया हो। सवाल यह उठता है कि क्या ये पोल वास्तव में हवा के लिए बने थे या सिर्फ बिल पास कराने के लिए?
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी घटना हुई हो। “हर साल तूफान आता है, और हर बार कुछ न कुछ गिरता है — फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार पोल भी साथ ले गया,” एक दुकानदार ने हंसते हुए कहा।
मौके पर पहुंचे मजदूर व्यवस्था को संभालने में जुटे नजर आए, लेकिन जनता के मन में सवाल अब भी खड़े हैं —
क्या यह प्राकृतिक आपदा थी या ‘मानव निर्मित लापरवाही’ का नमूना?
आंधी तो हर साल आएगी, लेकिन अगर व्यवस्था हर बार यूं ही ‘उड़ती’ रही, तो फिर जिम्मेदारी किसकी है — हवा की या व्यवस्था बनाने वालों की?
